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Weather temperature in Sitapur, Uttar Pradesh, India


सीतापुर उत्तर प्रदेश के लखनऊ डिवीजन में है , सीतापुर शहर लखनऊ और शाहजहांपुर के मध्य में है ,यहाँ पर सरंये नदी है ,

सामान्य तथ्य,

  • सीतापुर जिले की जनसँख्या 151,827 और इसका शेत्रफल 5,743 km2 है
  • सीतापुर जिला 6 तहसील में विभाजित है ,सीतापुर ,बीसवां ,मिश्रिख ,लहरपुर ,महमूदाबाद और सिधौली
  • सीतापुर में 19 ब्लॉक है ,जिनमे दो संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों ( सीतापुर, मिस्रिख ) और नौ विधानसभा निर्वाचित ( सेवता , बीसवां , महमूदाबाद , सिधौली ( अनुसूचित जाति ), लहरपुर , सीतापुर , हरगांव ( अनुसूचित जाति ), मिस्रिख और मोहाली ) हैं ।
  • सीतापुर की मशहूर हस्तियाँ कैप्टन मनोज पांडेय, राजा टोडर मल , कवि नरोत्तम दास, आचारी नरेन्द्र देव , मौलाना फैज़ल हक खैराबादी रियाज खैराबादी , ज्वाला प्रशाद

   ऐतिहासिक तथ्य,
  • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार पांच मुख्य धार्मिक हिंदू स्थानों के ' पंच धाम यात्रा ' का रास्ता नीमसार , सीतापुर में एक धार्मिक प्राचीन जगह का दौरा किए बिना पूरा नहीं किया जाएगा।
  • कैप्टन मनोज पांडे ने कारगिल युद्ध (1999 ) में अपने जीवन का बलिदान दिया और परम वीर चक्र के साथ अपने जन्म स्थान को सम्मानित किया।
  • सीतापुर नेत्र अस्पताल उत्तर प्रदेश भर में नेत्र रोगियों की सेवा और नेत्रहीन लोगों को दृष्टि प्रदान कर रहा है । इसकी गिनती एशिया के कुछ बड़े अस्पतालों में की जाति है .
  • 1921 में सीतापुर के लोगों ने हजारों की संख्या में गाँधी जी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया। गांधी जी ने 1925 में सीतापुर आये और लालबाग में स्वतंत्रता आंदोलन में सहयोग करने की अपील की। कई राष्ट्रीय नेता मौलाना मोहम्मद अली, पंडित मोतीलाल , पं । जवाहर लाल भी वहां उपस्थित थे।
  • सीतापुर जिला हमेशा राजनीती में सक्रिय रहा । 1857 में पहली आजादी की लड़ाई में इस जिले ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1857 के दौरान आर्य समाज एवं सेवा समिति ने जिले में उनके संगठन की स्थापना की थी ।
  • इसका कोई अधिकारिक विवरण मौजूद नहीं है ,लेकिन पौराणिक तथ्यों के अनुसार सीतापुर ,भगवान राम की पत्नी सीता के नाम पर बसा है ,ऐसा कहा जाता है की भगवान् राम की पत्नी सीता के साथ यहाँ आये थे ,बाद में राजा विक्र्मद्त्य ने इस सहर की इस्थापना सीता की इस्म्रती में की और सहर को सीतापुर नाम दे दिया गया .
  • अबुल फजल की आइना अकबरी के अनुसार इस जगह को प्राचीन इतिहास में अकबर शासनकाल के दौरान चितियापुर बुलाया गया था , इस जगह कौशल नरेश पुत्र बिन्दुभ के बाद , मगध के शाषित के राज्य में शामिल किया गया था । नंदा और मौर्यों के पतन के बाद यह क्षेत्र शुंग वंश की सत्ता में आ गया .
  • शुंग शैली के कुछ मिट्टी की मूर्तियों तहसील सिधौली में पाई गई , इसी तरह, गुप्त काल के कुछ छोटे मूर्तियों बडेसर में गोमती के बाएं किनारे पर स्थित नैमिश्रन्यया की तहसील मिश्रिख पाए गए , महर्षि वेद व्यास द्वारा पुरानो की रचना यही की गई थी ,८८०००ऋषि मुनियोंओ ने शास्त्रों का ज्ञान यही से प्राप्त किया ,वैदिक काल में यहाँ एक बड़े विश्व विद्यालय के संकेत मिल रहे है .सौनक जी इस विश्विद्यालय के कुल पति थे .
  • पांडव निर्वासन के दौरान नैमिष आये थे ,भगवान् राम और सीता ने ,रावन मर्त्यु के कलंक को धोने के लिए इस पवित्र जगह पर स्नान किया था .ऐसा कहा जाता है की सीता ने अपनी पवित्रता को सिद्ध किया ,और नैमिष की पवित्र मिटटी में समावेश कर गई .


   औद्योगिक एवं पर्यटन,
  • पांच चीनी मिलों और कुछ आटा मिल, और चावल मिल यहाँ काम कर रहे हैं। सीतापुर अपनी कपास और ऊनी चटाई (दरी ) के लिए मुख्य रूप से प्रसिद्ध है। लहरपुर और खैराबाद इसके उत्पादन और निर्यात के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • मुगल काल के दौरान लहरपुर और खैराबाद इस्लामी ज्ञान के प्रसिद्ध केन्द्रों थे,, इन स्थानों पर 16 वीं शताब्दी ईस्वी से फारसी, अरबी, और संस्कृत भाषा के अध्ययन केंद्रों का निर्माण किया गया है। खैराबाद 19 वीं सदी के दौरान कई प्रमुख उर्दू कवि और लेखकों का जन्मस्थान रहा । मुर्तजा वसीम और रियाज खैराबादी उन के बीच प्रसिद्ध हैं। प्रसिद्ध कवि नरोत्तम दास भी सीतापुर के निवासी थे ।


My शहर, My सीतापुर

सीतापुर ने हमेशा ही एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है हिन्दुतान के इतिहास में और अभी भी व्यावसायिक, धार्मिक और और कृषि जैसे छेत्रो में सराहनीय उपलब्धिया प्राप्त करने के लिए जाना जाता है. हमारा उद्देश्य यही है की सीतापुर की इन उपलब्धियों को सब के सामने लाये और सभी को अवगत कराये.

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